लड़की की चाल का अंदाज पर्सनालिटी का आईना होता है

लड़की की चाल का

चेहरा पर्सनालिटी का आइना होता है यह तो सही है लेकिन लड़की की चाल का अंदाज तब व्यक्तित्व का आइना बन जाती है जब बड़े-बूढ़े लड़की की चाल से ही उसके चालचलन का अनुमान लगाने लगते है इसमें कोई दो राय नहीं है की अनुभवी निगाहों के समक्ष बिना जुबान से कुछ कहे, मात्र चलने के अंदाज से चरित्र बया हो जाता है शायद तभी लड़की को बहु के रूप में पसंद करने से पहले चाल का जायजा भी ले लिया जाता है

सुन्दर चेहरे,ग्लैमरयुक्त आकर्षक व्यक्तित्व व पतली कमर के संपूर्ण आकर्षण को लडखडाती चाल ख़त्म कर देती है चाल पर ध्यान न देकर सिर्फ सुन्दरता पर मगरूर रहने से तो सौन्दर्य का गरूर इस कदर सिर चढ़ कर बोलता है की कदम खुद ब खुद लड़खड़ाने लगते है

उची एडी के सैंडल पहनने पर या बहुत तंग कपडे पहनने पर या मैकअप, कैश्सज्जा व कपड़ो के नए फैशन को अपनाकर लजाने पर चाल बिगडती देखी गयी है इन के अलावा किशोरी के युवती बनने के दौर में शरीर में आने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों को अप्राकृतिक रूप से स्वीकारने पर भी चाल डगमगा जाती है

जिस्मानी बदलावों के दौर में किशोरिया साधारण न बनी रहकर अधिकतर झुक के बैठती और चलती है आगे चलकर यह स्थिति कूबड़ का रूप ले लेती है ऐसे में यदि लड़की के माता-पिता ,सखिया या नजदीकी रिश्तेदार उसे झुक कर हर काम करने ,झुक कर बैठने, झुक कर चलने के लिए बार-बार मना करे तो पहली बार में ही इस स्थिति को रोका जा सकता है!

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